GNLU ने क्रिप्टो एसेट विनियमन की राष्ट्रीय रूपरेखा तैयार करने के लिए सलाहकार बोर्ड और हितधारक परामर्श की पहली श्रृंखला आयोजित कर व्यापक संवाद की शुरुआत की।
गांधीनगर: गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (GNLU) ने भारत में क्रिप्टो एसेट्स के लिए एक संगठित और प्रभावी राष्ट्रीय विनियामक ढाँचा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपना पहला उच्च-स्तरीय सलाहकार बोर्ड परामर्श और क्षेत्रीय हितधारक परामर्श आयोजित किया। ये दोनों बैठकें विश्वविद्यालय की चल रही राष्ट्रीय शोध परियोजना के तहत आयोजित हुईं।
ये परामर्श GNLU के अंतःविषय अध्ययन—“Assessing the Case for Regulation of Crypto Assets in India”—का हिस्सा हैं। इस परियोजना का नेतृत्व GNLU के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस. शांताकुमार कर रहे हैं, जिनके साथ कानून, वाणिज्य और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों की एक शोध टीम काम कर रही है।
अध्ययन का उद्देश्य भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) से संबंधित वर्तमान कानूनी व्यवस्था का आकलन करना और भविष्य की नीतियों को दिशा देने हेतु एक साक्ष्य-आधारित विनियामक मॉडल तैयार करना है। सलाहकार बोर्ड की बैठक में विशेषज्ञों ने मौजूदा विनियामक कमियों पर विचार करते हुए निवेशक संरक्षण, बाजार अखंडता, प्रवर्तन तंत्र और नवाचार व स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करने जैसी महत्वपूर्ण जरूरतों पर व्यापक चर्चा की।
उच्च-स्तरीय सलाहकार बोर्ड में प्रतिष्ठित विधिवेत्ताओं, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, उद्योग नेताओं और तकनीकी उद्यमियों का प्रतिनिधित्व शामिल था। प्रमुख सदस्यों में आदरणीय न्यायमूर्ति एम. आर. शाह, न्यायमूर्ति रवि त्रिपाठी, श्री राजकुमार, श्री जे. पी. गुप्ता और डॉ. केशव कुमार शामिल रहे।
विचार-विमर्श के दौरान प्रमुख मुद्दों में क्रिप्टो एसेट्स की स्पष्ट विधायी परिभाषाओं की आवश्यकता, नियामक संस्थाओं के बीच अधिक तालमेल, कर प्रणाली में सरलता, मजबूत उपभोक्ता सुरक्षा, तथा विवाद समाधान और सीमा-पार अनुपालन के लिए बेहतर तंत्र विकसित करने जैसे विषय प्रमुख रहे।
इसके अतिरिक्त, GNLU ने बेंगलुरु—जो भारत का अग्रणी क्रिप्टो और ब्लॉकचेन नवाचार केंद्र है—में क्षेत्रीय हितधारक परामर्श भी आयोजित किया। इसमें उद्योग विशेषज्ञों, तकनीकी नवप्रवर्तकों, एक्सचेंज प्लेटफॉर्म प्रतिनिधियों और सेवा प्रदाताओं ने बाजार से जुड़े व्यावहारिक अनुभव, चुनौतियाँ और जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा देने हेतु आवश्यक सुधारों पर अपने सुझाव साझा किए।
इन दोनों परामर्शों से प्राप्त जानकारियों ने नीतिगत दृष्टिकोण और उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं का एकीकृत व संतुलित परिदृश्य प्रस्तुत किया है। GNLU का कहना है कि ये सुझाव परियोजना की अंतिम नीति-सिफारिशों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
प्रो. शांताकुमार ने कहा, “GNLU का उद्देश्य ऐसे विनियामक ढाँचे के निर्माण में योगदान देना है जो नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए उचित सुरक्षा उपायों और संस्थागत मजबूती को सुनिश्चित करें।”
परियोजना आने वाले महीनों में देशभर के हितधारकों से संवाद जारी रखेगी, ताकि भारत में क्रिप्टो एसेट्स के लिए एक सुव्यवस्थित, समग्र और प्रभावी विनियामक प्रणाली विकसित की जा सके।
