जून 2022 में शुरू हुई बातचीत 27 जनवरी 2026 को पूरी हुई। अब सवाल है—क्या इस बड़े समझौते के बाद भारत क्रिप्टो को लेकर साफ़ नियम बनाएगा?
भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आखिरकार पूरा हो गया है। इस समझौते को दोनों तरफ से “Mother of All Deals” कहा जा रहा है। यह डील सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि टेक्नोलॉजी, डिजिटल कारोबार और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों को भी प्रभावित करेगी। इसी वजह से अब भारतीय क्रिप्टो सेक्टर को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।
EU में क्रिप्टो के साफ़ नियम, भारत में अभी उलझन
यूरोप में क्रिप्टो को लेकर नियम पहले से तय हैं। वहां सरकार ने यह साफ़ कर दिया है कि क्रिप्टो कैसे चलेगा, कौन चलाएगा और निवेशकों की सुरक्षा कैसे होगी।
भारत में स्थिति थोड़ी अलग है। यहां:
क्रिप्टो पर 30% टैक्स है
1% TDS भी है
लेकिन यह अभी तक साफ़ नहीं है कि क्रिप्टो पूरी तरह कानूनी है या नहीं।
FTA के बाद भारत पर यह दबाव बढ़ सकता है कि वह भी क्रिप्टो के लिए साफ़ नियम बनाए।
FTA का क्रिप्टो से क्या रिश्ता है?
इस समझौते में डिजिटल व्यापार और फिनटेक को अहम माना गया है। अब अगर यूरोप की कंपनियां भारत में आना चाहेंगी, तो वे:
बिना नियमों के निवेश नहीं करेंगी
क्रिप्टो और ब्लॉकचेन के लिए स्पष्ट कानून चाहेंगी
इससे भारत को क्रिप्टो पर फैसला लेना ही पड़ेगा।
क्या भारत क्रिप्टो को मान्यता देगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत:
क्रिप्टो को एक डिजिटल एसेट मान सकता है
एक्सचेंजों के लिए नियम और लाइसेंस ला सकता है
निवेशकों की सुरक्षा पर ज़ोर दे सकता है
हालांकि सरकार का फोकस अभी भी डिजिटल रुपया पर है, लेकिन निजी क्रिप्टो को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करना अब मुश्किल होगा।
भारतीय क्रिप्टो कंपनियों के लिए मौका
अगर नियम साफ़ होते हैं तो:
भारतीय क्रिप्टो स्टार्टअप्स को विदेश में काम करने में आसानी होगी
विदेशी निवेश बढ़ सकता है
भारत से बाहर जा रही कंपनियों और टैलेंट को रोका जा सकता है
भारत-EU FTA भारतीय क्रिप्टो सेक्टर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। यह डील सरकार को मजबूर कर सकती है कि वह क्रिप्टो को लेकर साफ़ और मजबूत नियम बनाए।
