कौन से देश बना रहे हैं क्रिप्टो रिज़र्व, और भारत कहां खड़ा है?

कौन से देश बना रहे हैं क्रिप्टो रिज़र्व, और भारत कहां खड़ा है?

अमेरिका से लेकर भूटान तक — सरकारें अब बिटकॉइन रिज़र्व बना रही हैं। जानिए कौन से देश डिजिटल करेंसी में निवेश कर रहे हैं और भारत इस दौड़ में कहां खड़ा है।

नई दिल्ली: बिटकॉइन को कभी पारंपरिक वित्तीय व्यवस्था के खिलाफ एक विद्रोह के रूप में देखा गया था — एक ऐसी मुद्रा जो सरकारों और बैंकों से आज़ादी का प्रतीक थी। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। वही सरकारें, जिनसे बिटकॉइन ने खुद को अलग करने की कोशिश की थी, आज इसे अपने राष्ट्रीय रिज़र्व का हिस्सा बना रही हैं। अमेरिका से लेकर भूटान और एल साल्वाडोर तक, कई देश बिटकॉइन को “डिजिटल गोल्ड” के रूप में जमा कर रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है — जब दुनिया तेजी से क्रिप्टो रिज़र्व की ओर बढ़ रही है, तो भारत इस नई आर्थिक दौड़ में कहां खड़ा है?

दुनिया के देश अब ‘डिजिटल सोना’ जमा कर रहे हैं

जब बिटकॉइन की शुरुआत हुई थी, तो इसका उद्देश्य सरकारों से स्वतंत्र मुद्रा बनना था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं — दुनिया की सरकारें ही बिटकॉइन जमा कर रही हैं!

ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, विभिन्न देशों की सरकारों और सॉवरेन फंड्स के पास मिलाकर 5 लाख से ज़्यादा बिटकॉइन हैं।

कुछ देश इसे “डिजिटल गोल्ड रिज़र्व” मानते हैं, तो कुछ इसे नई टेक्नोलॉजी का हिस्सा समझते हैं।

यानी, क्रिप्टो अब सिर्फ़ निवेश नहीं, बल्कि राष्ट्रों की रणनीति का हिस्सा बन चुका है।

अमेरिका: बना ‘डिजिटल फोर्ट नॉक्स’

अमेरिका के पास सबसे ज़्यादा 1,98,000 बिटकॉइन हैं — ज्यादातर अपराध मामलों में जब्त किए गए। मार्च 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने Strategic Bitcoin Reserve बनाने की घोषणा की, जिससे अमेरिका ने बिटकॉइन को आधिकारिक रिज़र्व संपत्ति का दर्जा दिया। अब अमेरिकी ट्रेज़री इसे “Digital Fort Knox” कहती है।

चीन: सबसे रहस्यमयी क्रिप्टो होल्डर

चीन ने 2019 में PlusToken घोटाले से लगभग 1,94,000 BTC जब्त किए थे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वह अब भी इन्हें रखे हुए है या बेच चुका है। बिटकॉइन समुदाय लगातार पारदर्शिता की मांग कर रहा है।

भूटान: हिमालय का ‘हाइड्रो-बिटकॉइन’ मॉडल

भूटान ने दिखाया है कि स्वच्छ ऊर्जा और क्रिप्टो माइनिंग साथ-साथ चल सकते हैं। देश जलविद्युत से बिटकॉइन माइन करता है और इसके पास करीब 11,286 BTC हैं।

एल साल्वाडोर: बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा बनाने वाला पहला देश

एल साल्वाडोर ने बिटकॉइन को Legal Tender घोषित कर दिया है। इसके पास लगभग 6,246 BTC हैं और राष्ट्रपति बुकेले इसे राष्ट्र की आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक मानते हैं।

अबू धाबी: अरब की क्रिप्टो राजधानी

अबू धाबी का सॉवरेन फंड दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फंड है। उसने Coinbase, DeFi प्लेटफॉर्म्स और BlackRock के Bitcoin ETF में लगभग $500 मिलियन का निवेश किया है।

नॉर्वे और लक्ज़मबर्ग: निवेश के नए रास्ते

नॉर्वे के $1.7 ट्रिलियन फंड के पास अप्रत्यक्ष रूप से 11,400 BTC का एक्सपोज़र है। वहीं लक्ज़मबर्ग 2026 से अपने फंड का 1% हिस्सा Bitcoin ETFs में लगाने जा रहा है।

ब्रिटेन और जर्मनी: जब्ती और बिक्री से बना रिज़र्व

ब्रिटेन के पास 61,245 BTC हैं, जो मुख्य रूप से अपराध से जब्त की गई संपत्ति हैं।

वहीं जर्मनी ने 2024 में 50,000 BTC बेचकर अरबों डॉलर कमाए।

यूक्रेन: युद्ध में मिला क्रिप्टो समर्थन

रूस के खिलाफ युद्ध के दौरान क्रिप्टो समुदाय से यूक्रेन को 46,000 BTC का दान मिला। हालांकि, अब इन फंड्स की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं है।

भारत कहां खड़ा है?

भारत ने अब तक कोई आधिकारिक क्रिप्टो रिज़र्व नहीं बनाया है। सरकार फिलहाल बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा या रिज़र्व संपत्ति नहीं मानती।

हालांकि, रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी डिजिटल करेंसी — e₹ (ई-रुपया) का ट्रायल शुरू किया है, ताकि सरकारी स्तर पर ब्लॉकचेन तकनीक को समझा जा सके।

भारत ने क्रिप्टो ट्रेडिंग पर पाबंदी नहीं लगाई, लेकिन इसे कड़ा टैक्स ढांचा दिया है —

• 30% टैक्स क्रिप्टो कमाई पर

• 1% TDS हर लेन-देन पर

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले सालों में अगर बाकी देश बिटकॉइन रिज़र्व बढ़ाते हैं, तो भारत भी धीरे-धीरे अपनी नीति पर पुनर्विचार कर सकता है।

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