तेजी से बढ़ रहा बाजार, फिर भी साफ नीति के बिना बढ़ रही उलझन
भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) यानी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लोग बड़ी संख्या में इसमें निवेश कर रहे हैं और देश दुनिया के टॉप क्रिप्टो अपनाने वाले देशों में शामिल है। लेकिन दूसरी तरफ, सरकार की तरफ से अभी तक इस सेक्टर के लिए साफ और स्थिर नियम नहीं बने हैं। यही सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है।
भारत बना ग्लोबल लीडर, फिर भी कन्फ्यूजन जारी
भारत लगातार तीसरे साल क्रिप्टो अपनाने के मामले में दुनिया में आगे रहा है। कई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि भारत Web3 और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सिर्फ निवेश ही नहीं, भारत में डेवलपर्स और स्टार्टअप्स भी तेजी से इस सेक्टर में काम कर रहे हैं और ग्लोबल प्रोजेक्ट्स में योगदान दे रहे हैं। इससे साफ है कि देश में इस तकनीक को लोग अपनाने लगे हैं।
सरकार का रुख अब भी सतर्क
इतनी तेजी के बावजूद सरकार अभी भी इस सेक्टर को लेकर पूरी तरह खुलकर सामने नहीं आई है। उसकी चिंता है कि इससे देश की वित्तीय स्थिरता, पैसे का नियंत्रण और भुगतान प्रणाली प्रभावित हो सकती है।
लेकिन समस्या यह है कि क्रिप्टो एक ग्लोबल और इंटरनेट बेस्ड सिस्टम है, जिसे पुराने नियमों से कंट्रोल करना आसान नहीं है।
टैक्स है, लेकिन नियम पूरे नहीं
सरकार ने क्रिप्टो पर 30% टैक्स और 1% TDS लागू किया है। इसका मकसद था कि लेन-देन पर नजर रखी जा सके और टैक्स कलेक्शन बढ़े।
लेकिन हुआ इसका उल्टा। ज्यादा टैक्स और सख्ती के कारण कई लोग भारतीय प्लेटफॉर्म छोड़कर विदेशी प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करने लगे।
विदेशी प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहे यूजर्स
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुलाई 2022 से दिसंबर 2023 के बीच भारतीय यूजर्स ने ₹1.03 ट्रिलियन से ज्यादा ट्रेड विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर किया।
इससे सरकार को टैक्स का बड़ा नुकसान हुआ और लेन-देन पर निगरानी भी कमजोर हो गई।
सरकार ने कुछ विदेशी वेबसाइट्स ब्लॉक करने की कोशिश भी की, लेकिन यूजर्स VPN और दूसरे तरीकों से फिर भी वहां ट्रेड कर रहे हैं।
दुनिया क्या कर रही है?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर IMF, FSB और FATF जैसी संस्थाएं मानती हैं कि क्रिप्टो को बैन करने से समस्या हल नहीं होगी। इसके बजाय सही नियम बनाकर इसे कंट्रोल करना ज्यादा बेहतर तरीका है।
दूसरे देश भी अब ऐसा सिस्टम बना रहे हैं, जहां क्रिप्टो कंपनियां नियमों के अंदर काम करें और सरकार को भी निगरानी का मौका मिले।
भारत के लिए क्या चुनौती है?
आज भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि क्रिप्टो को अपनाना है या नहीं। लोग तो इसे पहले ही अपना चुके हैं।
असली सवाल यह है कि क्या सरकार इसके लिए साफ, संतुलित और काम करने वाले नियम बना पाएगी या नहीं।
आगे का रास्ता
अगर भारत जल्द ही एक मजबूत और स्पष्ट नीति नहीं बनाता, तो:
- टैक्स का नुकसान बढ़ सकता है
- यूजर्स विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर जाते रहेंगे
- सरकार की पकड़ कमजोर होती जाएगी
इसलिए जरूरी है कि सिर्फ टैक्स लगाने के बजाय एक पूरा सिस्टम तैयार किया जाए, जो निवेशकों की सुरक्षा करे, नवाचार को बढ़ावा दे और बाजार को भी नियंत्रित रखे।
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