भारत का जेन Z क्रिप्टो में क्यों लगाए बड़ा दांव?

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युवा पीढ़ी डिजिटल गोल्ड की ओर क्यों आकर्षित हो रही है

महज एक दशक पहले क्रिप्टोकरेंसी एक टेक्नोलॉजी का प्रयोग थी, लेकिन आज ये पूरी दुनिया का फाइनेंशियल फेनोमेनन बन चुकी है। पश्चिमी देशों से शुरू हुई ये लहर अब उभरते बाजारों में सबसे तेज फैल रही है। और भारत इसमें सबसे आगे है।

भारत में क्रिप्टो यूजर्स की संख्या 2025 में 11.9 करोड़ पहुंच चुकी है, जो 2026 के अंत तक 12.3 करोड़ हो जाने का अनुमान है। लेकिन असली ड्राइवर कौन है? जेन Z (18-25 साल)। CoinSwitch की Q3 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, जेन Z अब भारत के क्रिप्टो निवेशकों में 37.6% हिस्सा रखता है, जो मिलेनियल्स (26-35 साल) के 37.3% से भी आगे है। कई रिपोर्ट्स में जेन Z और मिलेनियल्स मिलाकर 75% तक निवेशक युवा हैं, जबकि 66% यूजर्स 35 साल से नीचे हैं।

Unocoin के को-फाउंडर और CEO सथ्विक विश्वनाथ कहते हैं, “भारत के युवा निवेशक डेमोग्राफी, टेक्नोलॉजी और महत्वाकांक्षाओं के कारण अगले क्रिप्टो साइकल के केंद्र में हैं।”

1. दुनिया की सबसे युवा आबादी + टेक-नेटिव माइंडसेट

भारत की आबादी का 50% से ज्यादा हिस्सा 30 साल से कम उम्र का है। ये युवा स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और UPI के साथ बड़े हुए हैं। औसतन भारतीय रोजाना 7.3 घंटे इंटरनेट पर बिताते हैं। 80 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट यूजर्स और 60 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स के साथ क्रिप्टो ऐप्स खोलना उनके लिए उतना ही आसान है जितना Paytm से पेमेंट करना।

सथ्विक विश्वनाथ कहते हैं, “पुरानी पीढ़ी के मुकाबले युवा नई फिनटेक को आजमाने के लिए ज्यादा तैयार हैं। ब्लॉकचेन और डिसेंट्रलाइज्ड सिस्टम उन्हें डराते नहीं, बल्कि आकर्षित करते हैं।”

2. कम पूंजी, तुरंत शुरू, SIP जैसा ट्रेंड

क्रिप्टो एक्सचेंज और फिनटेक ऐप्स ने KYC और अकाउंट खोलना मिनटों का काम बना दिया है। न्यूनतम निवेश ₹100-₹500 से शुरू। यही कारण है कि कॉलेज स्टूडेंट्स और शुरुआती जॉब करने वाले युवा भी आसानी से एंट्री ले रहे हैं।

2025 में क्रिप्टो SIP में 60% से ज्यादा सालाना वृद्धि हुई। CoinDCX अकेले ने 5.72 लाख नए SIP प्लान जोड़े। युवा अब साप्ताहिक या मासिक छोटी रकम डालकर लंबी अवधि के लिए बिटकॉइन और ईथरियम में निवेश कर रहे हैं।

3. महंगाई, जॉब प्रेशर और “अल्टरनेटिव वेल्थ” की तलाश

महंगाई बढ़ रही है, जॉब मार्केट कॉम्पिटिटिव है, सैलरी में सुरक्षा नहीं। पारंपरिक विकल्प जैसे रियल एस्टेट में करोड़ों लगते हैं और स्टॉक मार्केट में रिटर्न धीरे आते हैं। लेकिन क्रिप्टो में छोटी रकम में उच्च रिटर्न की संभावना है।

Reuters की रिपोर्ट में नागपुर के फूल विक्रेता आशीष नगोसे जैसे कई युवा बताते हैं कि साइड इनकम के लिए वे क्रिप्टो ट्रेडिंग कर रहे हैं। FOMO (Fear Of Missing Out), दोस्तों का प्रभाव और सोशल मीडिया पर सफल स्टोरीज युवाओं को खींच रही हैं।

4. टियर-2 और टियर-3 शहरों का क्रांति

पहले सिर्फ मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु में क्रिप्टो था। अब जयपुर, लखनऊ, पटना जैसे शहरों में भी तेज उछाल। दिल्ली 19.3% शेयर के साथ टॉप पर, उसके बाद बेंगलुरु (8.9%) और मुंबई (7%)। बेहतर इंटरनेट और स्मार्टफोन ने इन शहरों के युवाओं को ग्लोबल मार्केट से जोड़ दिया। अब वे भी वेल्थ क्रिएशन में हिस्सा ले रहे हैं।

5. सिर्फ निवेश नहीं, इनोवेशन भी

भारत दुनिया के सबसे बड़े ब्लॉकचेन डेवलपर पूल में शामिल है। जेन Z सिर्फ खरीद-बेच नहीं रहे, बल्कि:

  • Web3 स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं
  • NFT, गेमिंग (Play-to-Earn) और डिसेंट्रलाइज्ड ऐप्स बना रहे हैं
  • ग्लोबल ब्लॉकचेन प्रोजेक्ट्स में योगदान दे रहे हैं

Binance जैसी कंपनियां युवाओं के लिए फ्री कोर्स चला रही हैं। महिलाओं की भागीदारी भी बढ़कर 12% हो गई है।

6. चुनौतियां भी कम नहीं

30% TDS और VDA टैक्स, रेगुलेटरी अनिश्चितता अभी भी बाधा है। सरकार अभी भी क्रिप्टो को पूरी तरह रेगुलेट नहीं कर पाई है। लेकिन युवा उम्मीद रखते हैं कि आने वाले सालों में बेहतर नियम बाजार को और बूस्ट देंगे।

निष्कर्ष: जेन Z भारत को क्रिप्टो सुपरपावर बना रहा है

भारत Chainalysis 2025 ग्लोबल अडॉप्शन इंडेक्स में टॉप पर है। जेन Z न सिर्फ निवेश कर रहा है, बल्कि देश को वेब3 लीडर बना रहा है। सथ्विक विश्वनाथ का अंतिम शब्द बिल्कुल सही है: “भारत के युवा निवेशक न सिर्फ देश की, बल्कि पूरी दुनिया की क्रिप्टो कहानी बदल रहे हैं।”

अगर आप भी 18-30 साल के हैं और अभी तक क्रिप्टो नहीं छुआ, तो शायद समय आ गया है। लेकिन याद रखें – रिसर्च करें, छोटे से शुरू करें और रिस्क को समझें।

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