बैंक जमा पर ब्याज बढ़ने से स्टेबलकॉइन की मांग और बाजार की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के अध्ययन में USDT और USDC पर ब्याज दरों के अलग-अलग प्रभाव का भी पता चला।
नई दिल्ली, स्टेबलकॉइन अब केवल क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-बिक्री का माध्यम नहीं रह गए हैं। लोग इनका इस्तेमाल डिजिटल डॉलर के रूप में अपनी रकम रखने और ट्रांसफर करने के लिए भी कर रहे हैं। ऐसे में स्टेबलकॉइन और पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के एक नए अध्ययन के अनुसार, जब बैंक जमा पर ज्यादा ब्याज देते हैं, तो स्टेबलकॉइन बाजार की वृद्धि धीमी पड़ सकती है।
अध्ययन में जनवरी 2019 से जून 2025 तक के अमेरिकी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसके नतीजे बताते हैं कि बैंक जमा पर मिलने वाला ब्याज स्टेबलकॉइन की मांग को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बदलाव का असर अब क्रिप्टो बाजार तक पहुंचने का एक अतिरिक्त रास्ता बन सकता है।
क्या हैं स्टेबलकॉइन और क्यों बढ़ रही है इनकी अहमियत?
स्टेबलकॉइन ऐसी क्रिप्टोकरेंसी हैं, जिनकी कीमत अमेरिकी डॉलर जैसी किसी पारंपरिक मुद्रा या अन्य संपत्ति से जुड़ी होती है। इनका उद्देश्य कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव को सीमित रखना है। हालांकि, डॉलर से जुड़ी कीमत बनाए रखने का लक्ष्य होने के बावजूद इनमें जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं होता।
टेथर का USDT और सर्किल का USDC दुनिया के प्रमुख डॉलर-आधारित स्टेबलकॉइन में शामिल हैं। इनका इस्तेमाल क्रिप्टो ट्रेडिंग, डिजिटल भुगतान, अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण और विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi) से जुड़ी सेवाओं में किया जाता है।
BIS के अध्ययन के अनुसार, स्टेबलकॉइन का कुल बाजार मूल्य 2019 में 5 अरब डॉलर से कम था, जो जून 2025 तक बढ़कर 220 अरब डॉलर से अधिक हो गया। इस तेज विस्तार ने स्टेबलकॉइन को वैश्विक डिजिटल वित्त व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।
स्टेबलकॉइन और बैंक जमा के बीच एक अहम अंतर है। बैंक बचत खाते या कुछ अन्य जमा योजनाओं में ग्राहक को ब्याज मिल सकता है, जबकि स्टेबलकॉइन अपने पास रखने पर आम तौर पर सीधे ब्याज नहीं देते। यही अंतर लोगों के लिए यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि वे अपना पैसा बैंक में रखें या डिजिटल डॉलर के रूप में।
बैंक की ब्याज दरें स्टेबलकॉइन को कैसे प्रभावित करती हैं?
जब बैंक जमा पर कम ब्याज देते हैं, तो ग्राहकों को अपनी रकम बैंक में रखने से अपेक्षाकृत कम वित्तीय लाभ मिलता है। ऐसी स्थिति में कुछ लोग स्टेबलकॉइन जैसे वैकल्पिक माध्यमों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
इसके विपरीत, जब बैंक जमा पर ब्याज बढ़ाते हैं, तो बैंक में पैसा रखना अधिक आकर्षक हो सकता है। इससे स्टेबलकॉइन में नई रकम आने की रफ्तार कम हो सकती है।
यह प्रतिस्पर्धा नियामकों और वित्तीय संस्थानों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि बड़े पैमाने पर लोग बैंक जमा से पैसा निकालकर स्टेबलकॉइन में रखने लगें, तो बैंकों की जमा राशि पर दबाव पड़ सकता है। जमा राशि बैंकों के लिए कर्ज देने और अन्य वित्तीय गतिविधियों को संचालित करने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
हालांकि, स्टेबलकॉइन में पैसा रखने और बैंक जमा के बीच सीधा संबंध हर स्थिति में समान नहीं होगा। उपयोगकर्ता भुगतान की सुविधा, लेनदेन की गति, क्रिप्टो बाजार तक पहुंच और दूसरे वित्तीय कारणों से भी स्टेबलकॉइन चुन सकते हैं।
BIS ने अपने अध्ययन में क्या पाया?
स्टेबलकॉइन बाजार पर बैंक ब्याज दरों के प्रभाव को मापना आसान नहीं है, क्योंकि इसका आकार अमेरिकी बैंकिंग व्यवस्था की तुलना में काफी छोटा रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत ब्याज दर और बैंकों द्वारा जमा पर दिए जाने वाले ब्याज के बीच संबंध का विश्लेषण किया।
अध्ययन के अनुसार, जब फेडरल रिजर्व की नीतिगत दर लगभग 3% से नीचे रहती है, तो बैंक जमा पर ब्याज दरें अपेक्षाकृत कम बढ़ाते हैं। लेकिन जब नीतिगत दर इस स्तर से ऊपर जाती है, तो बैंक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए जमा पर ब्याज बढ़ाने लगते हैं।
शोधकर्ताओं ने इस अंतर का इस्तेमाल यह समझने के लिए किया कि बैंक जमा पर मिलने वाले ब्याज में बदलाव का स्टेबलकॉइन बाजार की वृद्धि पर क्या असर पड़ता है।
अध्ययन में पाया गया कि बैंक जमा पर औसत ब्याज दर में केवल 0.01 प्रतिशत अंक की वृद्धि होने पर अगले 10 सप्ताह में स्टेबलकॉइन की वृद्धि दर धीमी पड़ गई।
शोधकर्ताओं की एक गणना पद्धति के अनुसार, वृद्धि दर में लगभग 3 प्रतिशत अंक की कमी आई। उनकी पसंदीदा गणना पद्धति से यह कमी करीब 9 प्रतिशत अंक रही।
इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि बैंक ब्याज बढ़ने पर स्टेबलकॉइन का कुल बाजार मूल्य अनिवार्य रूप से घट जाएगा। अध्ययन का मुख्य निष्कर्ष यह है कि बैंक जमा पर अधिक ब्याज मिलने से स्टेबलकॉइन बाजार के विस्तार की गति कम हो सकती है।
2022-23 में स्टेबलकॉइन बाजार क्यों गिरा था?
अध्ययन में 2022 और 2023 के उस दौर का भी संदर्भ मिलता है, जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में तेजी से वृद्धि की थी। इसी अवधि में स्टेबलकॉइन का कुल बाजार मूल्य लगभग 30% गिर गया था।
हालांकि, इस गिरावट को केवल ब्याज दरों से जोड़ना सही नहीं होगा। इसी दौरान टेरायूएसडी (TerraUSD) के पतन और क्रिप्टो एक्सचेंज FTX के दिवालिया होने जैसी बड़ी घटनाएं भी हुई थीं। इन घटनाओं ने क्रिप्टो बाजार में विश्वास और निवेशकों की गतिविधियों को प्रभावित किया।
इसलिए बाजार में आई गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं। BIS का अध्ययन ब्याज दरों और स्टेबलकॉइन की वृद्धि के बीच संबंध को समझने में मदद करता है, लेकिन यह दावा नहीं करता कि ब्याज दरें ही बाजार में होने वाले हर बदलाव की वजह हैं।
USDC पर ब्याज दरों का असर USDT से ज्यादा क्यों?
अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि ब्याज दरों में बदलाव का प्रभाव सर्किल के USDC पर टेथर के USDT की तुलना में अधिक दिखाई दिया।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इसकी एक संभावित वजह दोनों स्टेबलकॉइन के उपयोगकर्ताओं और बाजारों में अंतर है।
USDC का इस्तेमाल अमेरिकी संस्थानों और विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi) प्लेटफॉर्म पर अधिक होता है। ऐसे उपयोगकर्ता अमेरिकी वित्तीय परिस्थितियों और बैंक जमा पर मिलने वाले ब्याज में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
दूसरी ओर, USDT का इस्तेमाल अमेरिका के बाहर और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भी बड़े पैमाने पर होता है। इन बाजारों में स्टेबलकॉइन का उपयोग केवल निवेश या बचत के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि भुगतान और मूल्य हस्तांतरण के लिए भी किया जाता है। ऐसे में अमेरिकी बैंक जमा दरों में बदलाव का असर USDT की मांग पर अपेक्षाकृत कम हो सकता है।
हालांकि, यह अंतर दोनों स्टेबलकॉइन के उपयोग की प्रवृत्तियों से जुड़ा निष्कर्ष है। इससे यह नहीं माना जाना चाहिए कि USDT या USDC में से कोई एक हर परिस्थिति में अधिक स्थिर या सुरक्षित है।
स्टेबलकॉइन नियमन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अध्ययन?
BIS के निष्कर्ष ऐसे समय में सामने आए हैं, जब दुनिया भर के नियामक स्टेबलकॉइन के लिए उचित नियम बनाने पर विचार कर रहे हैं। स्टेबलकॉइन बाजार का विस्तार भुगतान व्यवस्था, बैंकिंग क्षेत्र और वित्तीय स्थिरता पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर नई चर्चाएं पैदा कर रहा है।
नियामकों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। क्या स्टेबलकॉइन जारी करने वाली कंपनियों को अपने टोकन रखने वाले उपयोगकर्ताओं को ब्याज देने की अनुमति मिलनी चाहिए? क्या इन कंपनियों को अपने रिजर्व का एक हिस्सा बैंक खातों में रखना अनिवार्य होना चाहिए? और यदि स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता है, तो इससे बैंकों की जमा राशि और कर्ज देने की क्षमता पर कितना प्रभाव पड़ेगा?
BIS का अध्ययन इन सवालों के सीधे जवाब नहीं देता। हालांकि, यह समझने के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक साक्ष्य उपलब्ध कराता है कि बैंक जमा पर ब्याज और स्टेबलकॉइन बाजार की वृद्धि के बीच संबंध हो सकता है।
क्रिप्टो बाजार के लिए क्या हैं इसके मायने?
स्टेबलकॉइन की बढ़ती लोकप्रियता डिजिटल संपत्तियों और पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था के बीच संबंध को मजबूत कर रही है। अब क्रिप्टो बाजार की गतिविधियों को समझने के लिए केवल बिटकॉइन की कीमत, निवेशकों की मांग या नियामकीय फैसलों पर नजर रखना पर्याप्त नहीं हो सकता। ब्याज दरें और बैंकिंग क्षेत्र में जमा पर मिलने वाला रिटर्न भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि बैंक जमा पर ब्याज बढ़ाते हैं, तो कुछ उपयोगकर्ताओं के लिए बैंक में पैसा रखना अधिक आकर्षक हो सकता है। इसके विपरीत, कम ब्याज दरों के दौर में स्टेबलकॉइन जैसे विकल्पों की मांग को समर्थन मिल सकता है।
फिर भी, स्टेबलकॉइन की भविष्य की वृद्धि केवल ब्याज दरों पर निर्भर नहीं करेगी। भुगतान की उपयोगिता, क्रिप्टो बाजार की स्थिति, नियामकीय स्पष्टता, उपयोगकर्ताओं का भरोसा और डिजिटल वित्तीय सेवाओं का विस्तार भी इसके विकास को प्रभावित करेंगे।
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