Web3 और क्रिप्टो स्टार्टअप्स के लिए आसानी से फंडिंग जुटाने का दौर अब बदल रहा है। निवेशक अब केवल आकर्षक टेक्नोलॉजी, टोकन मॉडल या बड़े-बड़े वादों के आधार पर पैसा लगाने के बजाय वास्तविक उपयोगिता, कमाई की क्षमता और लंबे समय तक टिकने वाले बिजनेस मॉडल पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। Truth Ventures के CEO वरुण दत्ता के मुताबिक, फंडिंग के इस बदले हुए माहौल से Web3 इंडस्ट्री में मजबूत और टिकाऊ कंपनियों के उभरने का रास्ता खुल सकता है।
Web3 फंडिंग में गिरावट नहीं, निवेशकों की रणनीति में बदलाव
क्रिप्टो वेंचर कैपिटल मार्केट में निवेश पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन निवेशकों का पैसा किन कंपनियों तक पहुंच रहा है, इसमें बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।
Galaxy Research के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में क्रिप्टो और ब्लॉकचेन कंपनियों ने लगभग 5.7 अरब डॉलर की फंडिंग हासिल की, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 31% अधिक थी। हालांकि, इस पूंजी का लगभग 80% हिस्सा पहले से स्थापित और विकास के बाद के चरण में मौजूद कंपनियों को मिला।
दूसरी ओर, क्रिप्टो स्टार्टअप्स की वैल्यूएशन 2025 की चौथी तिमाही के उच्च स्तर से काफी नीचे आ गई है। इसी दौरान, Galaxy Research ने 2026 की दूसरी तिमाही में केवल पांच नए क्रिप्टो वेंचर फंड लॉन्च होने का रिकॉर्ड दर्ज किया, जो कई वर्षों में सबसे कम तिमाही आंकड़ा था।
सितंबर 2026 में भी यही रुझान दिखाई दिया। FinDaS के आंकड़ों के मुताबिक, महीने के दौरान Web3 सेक्टर में 48 फंडिंग राउंड के जरिए 1.05 अरब डॉलर जुटाए गए। इसके मुकाबले पिछले 12 महीनों का औसत लगभग 2.01 अरब डॉलर और करीब 67 फंडिंग राउंड प्रति माह था।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बाजार में पूंजी उपलब्ध है, लेकिन अब हर Web3 स्टार्टअप के लिए निवेश जुटाना पहले जितना आसान नहीं रहा।
पहले हाइप, अब वास्तविक बिजनेस मॉडल पर जोर
वरुण दत्ता के अनुसार, Web3 के शुरुआती विकास के दौरान कई बार मजबूत मार्केटिंग, लोकप्रिय नैरेटिव और आकर्षक टोकन मॉडल किसी प्रोजेक्ट को निवेश दिलाने के लिए पर्याप्त साबित होते थे। निवेशक टेक्नोलॉजी और अनुभवी फाउंडर्स से प्रभावित होकर पैसा लगा देते थे, जबकि कई मामलों में यह स्पष्ट नहीं होता था कि वास्तविक ग्राहक कौन होगा और कंपनी कमाई कैसे करेगी।
हालांकि, उस दौर में मिलने वाली आसान फंडिंग ने नई टेक्नोलॉजी के प्रयोग और ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को भी बढ़ावा दिया। इसलिए अधिक पूंजी वाले उस दौर को पूरी तरह नकारना उचित नहीं होगा।
समस्या तब सामने आई, जब कुछ कंपनियां अपने उत्पाद की वास्तविक उपयोगिता, ग्राहकों की जरूरतों और कमाई के स्थायी तरीकों पर ध्यान देने के बजाय लगातार नई फंडिंग पर निर्भर रहने लगीं।
अब निवेशक शुरुआत में ही इन सवालों के जवाब चाहते हैं:
- कंपनी किस वास्तविक समस्या का समाधान कर रही है?
- उसका उत्पाद मौजूदा विकल्पों से बेहतर क्यों है?
- क्या ग्राहक उस उत्पाद के लिए भुगतान करने को तैयार हैं?
- टोकन की कीमत गिरने या रिवॉर्ड कम होने पर भी क्या बिजनेस चल पाएगा?
दत्ता का मानना है कि निवेशकों की बढ़ती जांच-पड़ताल से कंपनियों को शुरुआत से ही मजबूत व्यावसायिक आधार तैयार करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
फंडिंग मुश्किल होने पर स्टार्टअप्स कैसे बदलेंगे?
जब किसी कंपनी को यह भरोसा नहीं रहता कि 12 से 18 महीने बाद उसे आसानी से नया निवेश मिल जाएगा, तो उसे उपलब्ध पूंजी का अधिक समझदारी से इस्तेमाल करना पड़ता है।
ऐसे माहौल में स्टार्टअप्स के लिए कुछ प्राथमिकताएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं:
- राजस्व पर ध्यान: कंपनी को जल्द यह समझना होगा कि वह वास्तविक कमाई कैसे करेगी।
- ग्राहकों को बनाए रखना: केवल नए यूजर्स जोड़ना पर्याप्त नहीं होगा। मौजूदा ग्राहकों का लगातार उत्पाद इस्तेमाल करना भी जरूरी होगा।
- खर्च पर नियंत्रण: कंपनियों को टीम के आकार, विस्तार और प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर सोच-समझकर खर्च करना होगा।
- प्रोडक्ट-मार्केट फिट: यह साबित करना होगा कि उत्पाद वास्तविक जरूरत पूरी करता है और उसकी मांग केवल मार्केटिंग या टोकन रिवॉर्ड पर निर्भर नहीं है।
Web3 में यह बदलाव खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ प्रोजेक्ट्स यूजर्स को टोकन रिवॉर्ड देकर तेजी से गतिविधि बढ़ाते हैं। लेकिन अधिक ट्रांजैक्शन या यूजर्स की संख्या अपने आप में स्थायी मांग का प्रमाण नहीं है।
दत्ता के नजरिए में असली सवाल यह है कि जब वित्तीय प्रोत्साहन कम हो जाएंगे, तब भी क्या लोग उस प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना चाहेंगे?
AI, DeFi और ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर में कहां हैं अवसर?
Web3 निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं के बीच उन परियोजनाओं पर ध्यान बढ़ रहा है, जो ब्लॉकचेन इकोसिस्टम की बुनियादी समस्याओं को हल करती हैं।
Galaxy Research के आंकड़ों में ट्रेडिंग, एक्सचेंज, निवेश और लेंडिंग से जुड़ी कंपनियों ने सबसे अधिक पूंजी आकर्षित की। इसके अलावा, DeFi, प्राइवेसी, सिक्योरिटी, टोकनाइजेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्षेत्रों में भी निवेश हुआ।
दत्ता के मुताबिक, AI एजेंट्स और उभरती मशीन इकॉनमी के विकास के साथ ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बढ़ सकती है, जो ऑटोमेटेड ट्रांजैक्शन को संभव बनाए।
इसमें कई अहम क्षेत्र शामिल हैं:
- सेटलमेंट: डिजिटल ट्रांजैक्शन का सुरक्षित और प्रभावी निपटान।
- आइडेंटिटी: यूजर्स, एप्लिकेशन और AI एजेंट्स की पहचान सुनिश्चित करना।
- स्केलेबिलिटी: बढ़ते ट्रांजैक्शन वॉल्यूम को संभालने की क्षमता।
- प्राइवेसी और सिक्योरिटी: संवेदनशील डेटा और डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा।
- इंटरऑपरेबिलिटी: अलग-अलग ब्लॉकचेन नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल।
ऐसी तकनीकों की उपयोगिता केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि किसी क्रिप्टो टोकन की कीमत बढ़ रही है या गिर रही है। यदि डिजिटल फाइनेंस और ब्लॉकचेन का इस्तेमाल बढ़ता है, तो इन बुनियादी सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है।
संस्थागत निवेश से क्या संकेत मिलता है?
डिजिटल एसेट डेटा कंपनी Kaiko में S&P Global के नेतृत्व में हुआ रणनीतिक निवेश भी इस दिशा का एक उदाहरण है। Kaiko 250 से अधिक वित्तीय कंपनियों, संस्थानों और नियामकों के साथ काम करती है।
ऑनचेन फाइनेंशियल मार्केट्स के विस्तार के लिए विश्वसनीय डेटा, एनालिटिक्स और बेंचमार्क की जरूरत होती है। ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की उपयोगिता को समझना अपेक्षाकृत आसान है, क्योंकि इसकी मांग किसी एक टोकन की अल्पकालिक कीमत पर निर्भर नहीं करती।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्टार्टअप को संस्थागत ग्राहकों पर ध्यान देना चाहिए। दत्ता के अनुसार, कंपनियों को निवेशकों के मौजूदा ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय ऐसी समस्या का समाधान तैयार करना चाहिए, जिसे वे वास्तव में अच्छी तरह समझती हों।
निवेशक अब फाउंडर्स में कौन-सी खूबियां तलाश रहे हैं?
शुरुआती चरण के Web3 स्टार्टअप्स के पास हमेशा पर्याप्त राजस्व, स्थापित ग्राहक आधार या पूरी तरह विकसित उत्पाद नहीं होता। इसलिए निवेशकों को केवल वित्तीय आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय फाउंडर की समझ, सोच और भविष्य की योजना का भी मूल्यांकन करना पड़ता है।
दत्ता के मुताबिक, निवेशकों के लिए कुछ प्रमुख बातें महत्वपूर्ण हैं।
1. समस्या की गहरी समझ: फाउंडर को स्पष्ट होना चाहिए कि वह किस समस्या को हल कर रहा है और उसका समाधान क्यों जरूरी है।
2. अपनी गलतियों को पहचानने की क्षमता: अच्छे फाउंडर अपनी धारणाओं को अंतिम सत्य नहीं मानते। वे समझते हैं कि उनकी योजना में क्या गलत हो सकता है और परिस्थितियों के अनुसार बदलाव के लिए तैयार रहते हैं।
3. नियामकीय समझ: बिजनेस मॉडल ऐसा नहीं होना चाहिए, जिसकी सफलता इस उम्मीद पर टिकी हो कि नियामक हमेशा किसी गतिविधि को नजरअंदाज करते रहेंगे।
4. प्रतिस्पर्धा से बचाव: केवल अच्छी टेक्नोलॉजी लंबे समय तक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त सुनिश्चित नहीं करती। नेटवर्क इफेक्ट्स, मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन, विशिष्ट डेटा, डेवलपर कम्युनिटी और दूसरी सेवाओं के साथ इंटीग्रेशन भी कंपनी को मजबूत बना सकते हैं।
इन मानकों से संकेत मिलता है कि Web3 निवेश अब केवल क्रिप्टो नैरेटिव पर दांव लगाने के बजाय पारंपरिक टेक्नोलॉजी कंपनियों की तरह बिजनेस की गुणवत्ता का आकलन करने की दिशा में बढ़ रहा है।
क्या Web3 स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग का नया दौर फायदेमंद होगा?
फंडिंग जुटाने की मुश्किलें निश्चित रूप से उन कंपनियों के लिए चुनौती हैं, जिन्हें लगातार बाहरी पूंजी की जरूरत होती है। लेकिन यह स्थिति उन फाउंडर्स के लिए अवसर भी पैदा कर सकती है, जो वास्तविक समस्याओं का समाधान तैयार कर रहे हैं।
जब निवेशक केवल लोकप्रिय ट्रेंड या टोकन की संभावित कीमत के आधार पर पैसा नहीं लगाते, तो मजबूत बिजनेस मॉडल वाले स्टार्टअप्स को अपनी उपयोगिता साबित करने का बेहतर अवसर मिलता है।
हालांकि, अधिक सख्त निवेश प्रक्रिया अपने आप में सफलता की गारंटी नहीं है। शुरुआती चरण की कंपनियों को अब भी पूंजी की जरूरत होगी और कई उपयोगी प्रोजेक्ट्स को अपना बाजार विकसित करने में समय लग सकता है।
निष्कर्ष: वरुण दत्ता का संदेश स्पष्ट है—Web3 इंडस्ट्री को महत्वाकांक्षी फाउंडर्स की जरूरत बनी रहेगी, लेकिन केवल बड़े विचार पर्याप्त नहीं होंगे। कंपनियों को यह भी साबित करना होगा कि उनके उत्पाद की वास्तविक मांग है, उनका बिजनेस आर्थिक रूप से टिकाऊ है और बाजार की परिस्थितियां बदलने के बाद भी ग्राहक उनके साथ बने रहेंगे।
फंडिंग का आसान दौर भले ही खत्म हो रहा हो, लेकिन इससे Web3 के लिए अधिक परिपक्व और मजबूत बिजनेस तैयार होने की संभावना बन सकती है।
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