भारत में USDT (Tether) का प्रीमियम पिछले कुछ दिनों में 8.5% से ऊपर पहुंच गया है — जो सामान्य स्तर (3-4%) से दोगुना से भी ज्यादा है। Enforcement Directorate (ED) की Bengaluru में क्रिप्टो रेमिटेंस कंपनियों पर की गई छापेमारी के बाद स्टेबलकॉइन की सप्लाई प्रभावित होने से यह स्थिति बनी है।
USDT पर क्या हो रहा है?
स्थानीय प्लेटफॉर्म्स पर USDT का भाव ₹102.88 तक पहुंच गया, जबकि USD-INR इंटरबैंक रेट ₹94.65 था। इस अंतर से साफ है कि घरेलू स्तर पर USDT की मांग तेज है, लेकिन सप्लाई कम हो गई है।
ED की कार्रवाई का कारण
17 जून को ED ने Bengaluru में 6 ठिकानों पर छापा मारा और 5 क्रिप्टो पेमेंट फर्म्स पर कार्रवाई की। आरोप है कि इन कंपनियों ने ₹2,500 करोड़ (लगभग $265 मिलियन) से ज्यादा के अनधिकृत क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसफर किए।
Non-Resident Indians (NRI) ने USDT को बैंक वायर के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया। रुपए जमा कर USDT में कन्वर्ट करके विदेश भेजा जाता था, जो FEMA और PMLA नियमों का उल्लंघन था। यह मॉडल पिछले दो साल से चल रहा था क्योंकि USDT ट्रांसफर तेज, सस्ता और प्रीमियम के कारण ज्यादा फायदेमंद था।
ED की कार्रवाई के बाद मार्केट मेकर्स और लिक्विडिटी प्रोवाइडर्स ने विदेश से USDT खरीदना कम कर दिया, जिससे घरेलू सप्लाई और सिकुड़ गई।
बड़े रेगुलेटरी संदर्भ
- 2 जुलाई को संसदीय वित्त समिति RBI और ICAI के साथ मीटिंग करेगी, जिसमें वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) पर आगे का रोडमैप तय होगा।
- RBI क्रिप्टो और स्टेबलकॉइन्स को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है।
- FATF की रिपोर्ट में 2025 में हुए अवैध वर्चुअल एसेट ट्रांजेक्शन्स का 84% स्टेबलकॉइन्स से जुड़ा था।
- भारत 2025 में भी ग्लोबल क्रिप्टो एडॉप्शन में नंबर 1 रहा।
Coinbase ने हाल ही में भारत में सीधे INR रेल्स लॉन्च किए हैं, लेकिन ED की कार्रवाई ने OTC और P2P रेमिटेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर सीधा असर डाला है।
भारतीय निवेशकों और यूजर्स के लिए क्या मतलब?
- USDT का हाई प्रीमियम रेमिटेंस करने वालों के लिए महंगा पड़ रहा है।
- क्रिप्टो एक्सचेंज और OTC डील्स पर नजर बढ़ गई है।
- FIU और ED दोनों की नजर क्रिप्टो पर सख्त हो रही है।
ED की कार्रवाई ने भारत में USDT की उपलब्धता को प्रभावित किया है, जिससे प्रीमियम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह घटना दिखाती है कि सरकार क्रिप्टो रेमिटेंस को रेगुलेट करने के लिए गंभीर है। आने वाले दिनों में संसदीय समिति की बैठक से क्रिप्टो रेगुलेशन की दिशा साफ हो सकती है।
भारतीय यूजर्स को सलाह है कि केवल FIU-रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करें और रेमिटेंस के लिए सभी नियमों का पालन करें।
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